महाकवि कालिदास व्यक्तित्व एवं कृतित्व

•​ कालिदास संस्कृत साहित्य के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं। महर्षि अरविंद ने कहा है – ‘वाल्मीकि,

व्यास तथा कालिदास प्राचीन भारतीय इतिहास की अंतरात्मा के प्रतिनिधि हैं और सब कुछ नष्ट हो

जाने के बाद भी इनकी कृतियों में हमारी संस्कृति के प्राण तत्व सुरक्षित रहेंगे।’

•​ कालिदास अपनी कृतियों में सत्यम्-शिवम्-सुन्दरम् का समन्वय स्थापित करने वाले महान् कलाकार

हैं। उन्होंने बाह्य जगत् का जितना सुंदर वर्णन किया, उतना ही मार्मिक व जीवंत आंतरिक जगत्

का चित्रण भी किया।

जन्मस्थान के विषय में विद्वानों में मतभेद है

•​ जन्मस्थान के विषय में विद्वानों में मतभेद है – कुछ विद्वान उन्हें उज्जैन का, कुछ गढ़वाल का,

कुछ कश्मीर का और कुछ बंगाल का निवासी मानते हैं। रघुवंश में वर्णित रघु की दिग्विजय यात्रा

तथा उज्जयिनी के प्रति उनका नैसर्गिक प्रेम कालिदास को उज्जैनवासी सिद्ध करता है।

•​ कालिदास परम शिवभक्त थे। रघुवंश का मंगलाचरणपद्य, कुमारसंभव का शिवराजधानी-वर्णन,

अभिज्ञानशाकुन्तलम् का अष्टप्रकृति-शिवस्वरूप-चित्रण – ये सभी उनकी नैष्ठिक शिवभक्ति को प्रकट

करते हैं।

काल-निर्धारण एक दुरूह कार्य है।

•​ काल-निर्धारण एक दुरूह कार्य है। यह प्रसिद्धि रही है कि महाकवि कालिदास श्रीविक्रमादित्य की

सभा के नवरत्नों में अन्यतम थे। कुछ विद्वान चंद्रगुप्त द्वितीय को कालिदास का आश्रयदाता

मानते हैं।

•​ कालिदास की प्रमाणिक कृतियाँ हैं – कुमारसंभवम्, मेघदूतम्, रघुवंशमहाकाव्यम्, माल्विकाग्निमित्रम्,

विक्रमोर्वशीयम् तथा अभिज्ञानशाकुन्तलम्।

•​ ऋतुसंहारम् उनकी प्रथम काव्यकृति मानी जाती है जिसमें ग्रीष्म से आरंभ कर छह ऋतुओं का

मनोरम वर्णन किया गया है।

•​ रघुवंशम् 19 सर्गों में विभक्त महाकाव्य है जिसमें रघुवंशियों के उदात्त चरित्रों ( गोपालन,

प्रजावत्सलता, दानशीलता आदि ) का लोकोत्तर वर्णन है। इसका सर्वश्रेष्ठ संदेश है – राजा वही योग्य

है जो प्रजा का हृदय जीत सके।

•​ अभिज्ञानशाकुन्तलम् 7 अंकों की यशस्वी कृति है। जर्मन कवि गोएटे का कथन है कि यदि तीनों

लोकों का ऐश्वर्य एक स्थान पर प्राप्त करने की इच्छा हो तो इस नाटक का अध्ययन एवं मनन

करना चाहिए।

•​ कालिदास अपनी उपमाओं के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। लाक्षणिक आचार्यों ने कहा है – ‘उपमा

कालिदासस्य’। भाव और कला दोनों के प्रयोग में वे सिद्धहस्त हैं। वैदर्भी रीति का प्रयोग उनकी

विशेषता है।

( महाकवि कालिदास व्यक्तित्व एवं कृतित्व )

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( महाकवि कालिदास व्यक्तित्व एवं कृतित्व )

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