मेघदूत का सारांश एवं साहित्यिि क महत्त्व

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मेघदूत का सारांश एवं साहित्यिि क महत्त्व •​ मेघदूत महाकवि कालिदास की एकमात्र कृति है जो उन्हें संसार में सर्वश्रेष्ठ कवि ख्यातित करने में पर्याप्त है। आंतरिक मनोभावों को शब्द प्रदान कर उनको सर्वसाधारण के लिए अनुभूतियोग्य बना देना ही महाकवि कालिदास की विशेषता है। •​ मेघदूत मनुष्य के भावों के चरमोत्कर्ष को दर्शाते हुए … Read more

उत्तरमेघ – श्लोक 25-52 (यक्ष का संदेश एवं समापन)

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उत्तरमेघ – श्लोक 25-52 (यक्ष का संदेश एवं समापन) •​ श्लोक 25 – यक्ष मेघ को अपनी पत्नी को संदेश देने के बारे में बताता है। दिन में व्यस्त होने के कारण तुम्हारी भाभी को वियोग उतना नहीं सताता होगा, (परंतु) रात्रि में विनोद-रहित तुम्हारी भाभी के अधिक दुखी होने की आशंका करता हूँ। अतः … Read more

उत्तरमेघ – श्लोक 1-24 (अलकापुरी एवं यक्षिणी का वर्णणन)

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उत्तरमेघ – श्लोक 1-24 (अलकापुरी एवं यक्षिणी का वर्णणन) •​ श्लोक 1 (उत्तरमेघ) – यक्ष द्वारा मेघ को अलकापुरी का मार्ग बताया जा रहा है। ‘जहाँ अलकापुरी में सुंदर स्त्रियों वाले, चित्रों से युक्त, संगीत के लिए मृदंग बजाए गए, मणि आदि रत्नों से सुशोभित भूमि वाले, आकाश तक छूते शिखरों से युक्त भवन, बिजली … Read more

पूर्ववमेघ – श्लोक 30-63 (उज्जयिनी एवं आगे का मार्गग)

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पूर्ववमेघ – श्लोक 30-63 (उज्जयिनी एवं आगे का मार्गग) • श्लोक 30 – यक्ष अवंती एवं उज्जयिनी का वर्णन करते हुए उनके गुणों का वर्णन करता है। ‘जहाँ ग्राम के वृद्धजन उदयन की कथा के जानकार हैं, ऐसी अवंती नामक नगरी पहुँचकर, पुण्यफलों के क्षीण हो जाने पर, बचे हुए पुण्यों से पृथ्वी पर स्वर्गवासियों … Read more

पूर्ववमेघ – श्लोक 1-29 (यक्ष का संदेश एवं मेघमार्गग)

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पूर्ववमेघ – श्लोक 1-29 (यक्ष का संदेश एवं मेघमार्गग) •​ श्लोक 1 (प्रथम श्लोक) – वस्तुनिर्देशात्मक मंगलाचरण के रूप में यक्ष का परिचय दिया गया है। यक्ष जो एक देवयोनि-विशेष है, वह अपने कर्तव्य से प्रमाद करने के कारण अर्थात् आलस्य करने के कारण, एकवर्षीय शाप से पीड़ित होकर, जिसकी सारी शक्तियाँ नष्ट कर दी … Read more

मेघदूत के पात्रों का चरित्र-चित्रण

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मेघदूत के पात्रों का चरित्र-चित्रण (क) यक्ष •​ यक्ष मेघदूत खंडकाव्य का नायक है। महाकवि कालिदास ने यक्ष के पात्र का सृजन करके सहृदय वियोगी के मनोभावों का जितना मार्मिक विश्लेषण किया है उतना अन्यत्र कहीं देखने को नहीं मिलता। •​ यक्ष एक देवयोनि-विशेष है। वह अपने स्वामी कुबेर की पूजा-अर्चना के निमित्त लाए जाने … Read more

मेघदूत में नगरों का वर्णणन

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मेघदूत में नगरों का वर्णणन •​ संस्कृत साहित्य का प्रथम खंडकाव्य मेघदूत अपनी तरह का एकमात्र खंडकाव्य है जहाँ महाकवि की संवेदनशीलता अपने उच्च शिखर पर प्राप्त होती है। इस खंडकाव्य में मेघ के माध्यम से जिस मार्ग का वर्णन किया गया है वह पूर्णतः भौगोलिक एवं प्रामाणिक है। •​ मालदेश – अलकापुरी तक के … Read more

मेघदूत में प्रकृति-चित्रण

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मेघदूत में प्रकृति-चित्रण •​ महाकवि कालिदास के ग्रंथों में प्रकृति-चित्रण के वैविध्य को देखकर प्रकृति के प्रति उनके अगाध प्रेम तथा सौंदर्यानुभूति का ज्ञान होता है। वे प्रकृति के पुजारी थे। •​ कालिदास ने प्रमुख रूप से प्रकृति के भव्य-मनोरम रूप एवं सौंदर्य का उद्घाटन किया है। मानव और प्रकृति दोनों का ही मंजुल संबंध … Read more

मेघदूत में रस, छंद, अलंकार एवं शैली

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मेघदूत में रस, छंद, अलंकार एवं शैली •​ रस – रस काव्य का आत्मभूत तत्व है। मेघदूत गीतिकाव्य का प्रधान रस विप्रलंभ शृंगार है। इसमें विरह-व्याकुल यक्ष-यक्षिणी की काम-दशाओं का सजीव चित्रण किया गया है। कालिदास प्रायः सभी रसों के प्रयोग में सिद्धहस्त थे। •​ उत्तरमेघ के श्लोक 21 में विरहावस्था का वर्णन : ‘अधिक … Read more

मेघदूत का वैशिष्ट्य

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मेघदूत का वैशिष्ट्य •​ मेघदूत संस्कृत साहित्य में पहले खंडकाव्य के रूप में अपना विशेष स्थान रखता है। यह लघु काव्य है जिसमें कुल 115 श्लोक हैं (पूर्वमेघ में 63 और उत्तरमेघ में 52), इसके अतिरिक्त 5 अन्य प्रक्षिप्त श्लोक भी हैं। •​ मेघदूत का प्रमुख रस विप्रलंभ शृंगार है, क्योंकि इसमें विरह-व्याकुल यक्ष-यक्षिणी की … Read more