मेघदूत में नगरों का वर्णणन

•​ संस्कृत साहित्य का प्रथम खंडकाव्य मेघदूत अपनी तरह का एकमात्र खंडकाव्य है जहाँ महाकवि की

संवेदनशीलता अपने उच्च शिखर पर प्राप्त होती है। इस खंडकाव्य में मेघ के माध्यम से जिस मार्ग

का वर्णन किया गया है वह पूर्णतः भौगोलिक एवं प्रामाणिक है।

•​ मालदेश – अलकापुरी तक के मार्ग का वर्णन करते हुए यक्ष मेघ से कहता है कि रामगिरि के पश्चात्

सर्वप्रथम मालदेश (मालव प्रदेश) जाओगे जहाँ कृषि का फल तुम्हारे अधीन होने से वहाँ की

भोली-भाली स्त्रियाँ स्नेहपूर्ण दृष्टि से तुम्हें देखेंगी।

•​ दशार्ण देश / विदिशा नगरी – यक्ष दशार्ण प्रदेश के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन करते हुए कहता है कि

विदिशा नगरी के पास पहुँचकर चंचल तरंगों वाली वेत्रवती (बेतवा नदी) से मिलकर तुम्हें कामुकता

का पूर्ण फल मिलेगा।

• उज्जयिनी नगरी – कालिदास के मेघदूत में उज्जयिनी के प्रति विशेष अनुग्रह दिखाई देता है।

यक्ष मेघ को उज्जयिनी के महलों की शोभा, अट्टालिकाओं से परिचय प्राप्त किए बिना न जाने का

सुझाव देता है।

•​ उज्जयिनी में महाकाल शिव का मंदिर है। यक्ष के अनुसार यदि शाम की आरती से पहले उज्जयिनी

पहुँच जाओ तो कुछ देर विश्राम करके सायंकालीन आरती में उपस्थित होकर अपनी गर्जना से नगाड़े

का कार्य करते हुए भगवान् शिव की पूजा का विशेष फल प्राप्त करो।

•​ उज्जयिनी के बाज़ारों में विविध रत्न-मणियाँ, शंख, सीपियाँ आदि सजाए हुए हैं और सबको देखकर

ऐसा लग रहा है मानो सागर में जल के अतिरिक्त कुछ शेष ही न रहा हो।

अलकापुरी

•​ अलकापुरी – मेघदूत खंडकाव्य के अनुसार अलकापुरी ही मेघ का अंतिम गंतव्य है। यक्ष मेघ से

कहता है कि जब तुम अलकापुरी पहुँच जाओगे तब वहाँ का सौंदर्य देखकर ही तुम यह अनुमान कर

सकते हो कि तुम अलकापुरी पहुँच गए हो।

•​ अलकापुरी में गगनचुंबी भवन मिलेंगे जिनमें निवास करने वाली सुंदर स्त्रियाँ अपनी चपलता के

कारण तुम्हारे भीतर से चमकने वाली बिजली की भाँति हैं। वहाँ की फर्श मणियों से जड़ी, दीवारें

विभिन्न प्रकार के चित्रों से सज्जित तथा रत्नों से युक्त हैं।

•​ अलकापुरी के वृक्षों पर 12 महीने फल लगे रहते हैं और प्रत्येक संध्या नित्यप्रति चाँदनी से उज्जवल

रहती है। वहाँ आनंद के कारण आँसू, काम के कारण ताप, प्रेम के कारण कलह होते हैं। वहाँ सभी

प्राणी यौवन-अवस्था को प्राप्त किए हुए हैं।

•​ अलकापुरी देवों के कोषाध्यक्ष कुबेर की राजधानी है। इस कारण वहाँ पर अत्यधिक संपन्नता है। वहाँ

की स्त्रियाँ बहुत सुंदर हैं तथा अपने सौंदर्य की वृद्धि के लिए अनेक प्रकार का शृंगार करती हैं।


( मेघदूत में नगरों का वर्णणन )


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