
जीवन के हर संघर्ष को जीतने का महासूत्र!
प्रेरणा दीप | अखण्ड ज्ञान — अप्रैल 2025 (पृष्ठ 40-41)
एक दिन, छह दोस्तों ने अपनी परीक्षा खत्म होने के बाद जंगल सफारी पर जाने का प्लान बनाया। इस शानदार यात्रा में उन्हें जंगल के دلچस्प जानवरों से मिलकर बहुत मज़ा आ रहा था। हर कोई जंगल के अनोखे और शक्तिशाली जानवरों को देखकर उत्साहित था।
श्रेष्ठ– ओ वाओ! देखो, यह है जंगल का सबसे बड़ा जानवर– हाथी!
सार्थक– सच में! हाथी की तो बात ही कुछ अलग है। इसकी लंबी सूंड देखो! चलो, इसकी सवारी करते हैं। (सभी मित्र हाथी पर चढ़ जाते हैं)
कबीर– दोस्तों, देखो! अब आ रहा है हमारे सामने जंगल का सबसे लंबा, सबसे ऊँचा जानवर– जिराफ! देखो इसके पैर तो क्या, गला भी कितना लंबा है!
विवेक– अरे, लोमड़ी को देखो! जंगल का सबसे समझदार जानवर! नहीं! नहीं! समझदार नहीं, चालाक! वैसे भी आजकल होशियार बनने के लिए चालाकी जरूरी है!
प्रद्युम्न– चलो, अब इन्हें भी देखो– हमारे चीता महाराज!! कितनी तेज़ी से दौड़ रहे हैं! मानना पड़ेगा, क्या लचीलापन है इनमें। वैसे बंधु चिंतन! तुम किस चिंतन में खोए हो?
चिंतन (सोचते हुए)– हम्म… तुम सबका उत्साह देखकर तो अच्छा लग रहा है, लेकिन मैं तो कुछ और ही सोच रहा था। तुम सब जिन-जिन जानवरों की बात कर रहे हो– हाथी, जिराफ, लोमड़ी और चीता– इनकी विशेषताएँ तो बहुत शानदार हैं, लेकिन फिर भी ‘जंगल का राजा’ तो शेर ही कहलाता है।
विवेक– सच भाई! सोचने वाली बात तो है। इतने विशेष गुण होने के बावजूद भी लोमड़ी, हाथी, चीता या जिराफ में से किसी पशु को वन सम्राट की उपाधि क्यों नहीं दी जाती? जंगल का राजा शेर को ही क्यों माना जाता है?
चिंतन (मुस्कुराते हुए)– दरअसल, शेर की असली ताकत उसकी शारीरिक बनावट या बौद्धिक चतुराई नहीं है। शेर शारीरिक रूप से सबसे तेज़ या सबसे बड़ा या सबसे ऊँचा जानवर नहीं है। मगर फिर भी उसका साहस और निडरता– उसे बाकी सभी जानवरों पर भारी कर देते हैं।
शेर को जंगल का राजा इसलिए माना जाता है, क्योंकि वह हर स्थिति का सामना साहस के साथ करता है। उसका दिल इतना हिम्मत वाला है कि वह किसी भी मुश्किल से डरता नहीं है। हर चुनौती से टकरा जाता है। उसकी आँखों में आँखें डालकर सामना करता है और उसे हरा भी देता है।
सार्थक– अच्छा, अब समझा! लेकिन एक बात बताओ, शेर में इतना साहस और निडरता कहाँ से आती है?
चिंतन (मुस्कुराते हुए)– दोस्तों, शेर के साहस का कारण है– आत्मविश्वास। प्रकृति ने उसे यह अद्भुत गुण दिया है, जिसके आगे अन्य जानवरों के सभी गुण बौने पड़ जाते हैं। अन्य कोई भी जानवर चाहकर भी इस गुण को पा नहीं सकता। वे सब प्रकृति के अधीन हैं।
श्रेष्ठ– बेचारे जानवर!
चिंतन—पर हम और तुम बेचारे नहीं हैं। हम प्रकृति के अधीन नहीं हैं। हम अपने पुरुषार्थ से कोई भी गुण प्राप्त कर सकते हैं।
कबीर– आत्मविश्वास भी?
चिंतन– अवश्य! पर यह गुण बाहर से नहीं, बल्कि भीतर से आता है। जब हम एक ब्रह्मनिष्ठ गुरु की शरण में जाते हैं, तो वो हमें आत्म-दर्शन कराते हैं। आत्मा का साक्षात्कार होने पर, जब हम उस पर ध्यान एकाग्र करते हैं, तो उसकी अनंत ऊर्जा के संपर्क में आते हैं। तब हमारे अंदर यह विश्वास उत्पन्न होता है कि हम अनंत शक्ति के स्वामी हैं। इसी ही आत्मविश्वास कहते हैं। तब हमारा मन शांत होता है, जिससे फिर हम किसी भी चुनौती को बिना डरे पार कर पाते हैं।
सार्थक– तो तुम कहना चाहते हो कि आत्म-साक्षात्कार के बाद अनुभव होती है आत्म-शक्ति, जिससे पैदा होता है आत्मविश्वास।
चिंतन– बिल्कुल! यही आत्मविश्वास फिर हमें हर परिस्थिति में निडर बना देता है। हम किसी भी चुनौती, कठिन से कठिन परीक्षा का सामना शेर जैसे साहस के साथ कर पाते हैं।
सभी मित्र (एक साथ)– चलो फिर, अब देर किस बात की है! आओ, चिंतन की तरह हम भी अपने भीतर का शेर जगाएं और जीवन की हर मुश्किल को साहस से पार करें।
मुक्त आह्वान
प्रिय पाठकों, यदि आप भी दिव्य ईश्वरीय अनुभूतियों का साक्षात्कार करना चाहते हैं, तो दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आपका आह्वान करता है। दिव्य गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी ऐसा सामर्थ्य रखते हैं कि आपके भीतर इन दिव्य अनुभूतियों को प्रकट कर देते हैं। आज विश्वभर में ऐसे लाखों-करोड़ों साधक हैं, जो गुरुदेव से ब्रह्मज्ञान की दीक्षा प्राप्त कर अपने भीतर ईश्वर का प्रकट दर्शन करते हैं। आपका भी दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान में स्वागत है।
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