मेघदूत का सारांश एवं साहित्यिि क महत्त्व
• मेघदूत महाकवि कालिदास की एकमात्र कृति है जो उन्हें संसार में सर्वश्रेष्ठ कवि ख्यातित करने में
पर्याप्त है। आंतरिक मनोभावों को शब्द प्रदान कर उनको सर्वसाधारण के लिए अनुभूतियोग्य बना
देना ही महाकवि कालिदास की विशेषता है।
• मेघदूत मनुष्य के भावों के चरमोत्कर्ष को दर्शाते हुए यथार्थ के धरातल पर उनका वर्णन करता है।
पूर्वमेघ तथा उत्तरमेघ इन दो भागों में विभक्त यह मेघदूत आंतरिक भावों की अभिव्यक्ति करते हुए
बाह्य जगत् से आपका परिचय कराता है।
• प्रस्तुत खंडकाव्य में साहित्यिक विवेचन के साथ-साथ ऐतिहासिक, भौगोलिक तथा पौराणिक संदर्भों
का भी यथोचित रीति से निवेश किया गया है। महाकवि कालिदास की यह कृति साहित्यिक रूप से
जितनी महत्त्वपूर्ण है, उतनी ही तत्कालीन भौगोलिक-ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को भी समृद्ध करती है।
• प्रकृति को सजीव बनाते हुए कालिदास ने प्रकृति को मानव जीवन का अंग बना दिया है। मेघदूत
अमर गीतिकाव्य है जिसमें बाह्य प्रकृति की मनोरम झाँकी प्रस्तुत है। इस गीतिकाव्य में
मानव-जगत् को प्राकृतिक जगत् से संबद्ध किया गया है।
• कवि कालिदास ने एक यक्ष के माध्यम से जहाँ कहीं मनुष्य के विरह का स्वाभाविक वर्णन करता है
वहीं रामगिरि से अलकापुरी तक मेघ-मार्ग के वर्णन में अपनी भौगोलिक निपुणता का भी परिचय
देता है।
मेघदूत की परम्परा
• मेघदूत की परम्परा का उद्वाहक है। मेघदूत से प्रेरणा लेकर कितने ही कवियों ने दूतकाव्य,
संदेशकाव्य का प्रणयन किया। मेघदूत की 50 से अधिक संस्कृत व्याख्याएँ अब तक हो चुकी हैं।
• महाकवि कालिदास की कल्पना, भाव-योजना, भाषा, छंद-विधान सभी चरमोत्कर्ष पर हैं। कालिदास
की कल्पना-शक्ति का उच्चतम स्तर का उपयोग मेघदूत में हुआ है।
• मेघदूत वास्तविकता में, यह प्रेम से आर्द्र एवं कातर हृदय की मधुर उद्वेजनाओं का मनोरम कोश है।
मनुष्य एवं प्रकृति का जो अद्वैत इसमें स्थापित हुआ है, वह साहित्य में एकदम निराला है।
• मेघदूत इतना संपन्न, इतना गेय, इतना मधुर, प्रौढ़ और सुरुचि-सौरभ से भरा काव्य है कि यदि
कालिदास ने इसके सिवा और कुछ न छोड़ा होता तब भी उनका स्थान संस्कृत कवियों की पहली
पंक्ति में होता।
• मेघदूत खंडकाव्य का शीर्षक ही इस ग्रंथ के महत्त्व को बताने के लिए पर्याप्त है। शीर्षक का
अध्ययन मात्र करने से ही सहृदय पाठक में उत्कंठा हो जाती है कि कैसे कोई मेघ दूत का कार्य कर
सकता है और कोई व्यक्ति कैसे और क्या संदेश मेघ के माध्यम से भेज सकता है।
IGNOU MSK-001 | मेघदूत – महाकवि कालिदास | खण्ड 4 (इकाई 16-20)