मेघदूत में प्रकृति-चित्रण
• महाकवि कालिदास के ग्रंथों में प्रकृति-चित्रण के वैविध्य को देखकर प्रकृति के प्रति उनके अगाध प्रेम
तथा सौंदर्यानुभूति का ज्ञान होता है। वे प्रकृति के पुजारी थे।
• कालिदास ने प्रमुख रूप से प्रकृति के भव्य-मनोरम रूप एवं सौंदर्य का उद्घाटन किया है। मानव और
प्रकृति दोनों का ही मंजुल संबंध तथा अद्भुत एकरसता का प्रदर्शन करके महाकवि ने प्रकृति के
अंदर स्फुरित होने वाले हृदय की पहचान की है।
• मेघदूत में हिमालय के परिसर का अत्यंत सुंदर वर्णन मिलता है। यहाँ गंगा स्वर्ग की सीढ़ी के
समान ऊपर उठा देने वाला है। आम्रकूट पर्वत के वर्णन में कवि का उपमा प्रयोग अत्यंत
चामत्कारिक बन उठा है।
• मेघदूत में वर्षा ऋतु और उसमें होने वाली प्राणियों की विविध उत्कंठा का जैसा चित्रण है वह अन्यत्र
दुर्लभ है। भोली-भाली ग्राम-वधुएँ मेघ को उत्सुकता से देखती हैं और चतुर पौर-वधुएँ मेघ को अपने
चंचल कटाक्षों का विषय बनाती हैं।
• कवि ने प्रकृति के बाह्य रूप का जितना विवेचन किया, अंतःप्रकृति के भी उतने ही पारखी हैं। वे
अनुभव-जन्य ज्ञान के आधार पर प्राकृतिक दृश्यों का सफल चित्रण करते हैं। उनका प्रकृति वर्णन
वैज्ञानिक होने के साथ-साथ प्रतिभा-मंडित भी है।
श्लोक
• पूर्वमेघ श्लोक 18 में आम्रकूट पर्वत का वर्णन : ‘पके हुए फलों से लदे आम के वृक्षों से घिरा हुआ
आम्रकूट पर्वत पीला-सा हो गया है। उसकी मेघाच्छन्न चोटी कोमल बालों के जूड़े के समान श्यामल
होकर पृथ्वी के स्तन की भाँति प्रतीत होगी।’
• प्रकृति-वर्णन के अतिरिक्त प्राकृतिक तत्वों के संरचनात्मक स्वरूप का भी कालिदास ने पर्याप्त रूप
से वर्णन किया है। पूर्वमेघ श्लोक 5 में वर्णित है : ‘कहाँ धुआँ, प्रकाश, जल एवं वायु का मिश्रण मेघ
और कहाँ सक्षम इंद्रियों वाले प्राणियों द्वारा ले जाने योग्य संदेश की बातें।’
• मेघदूत में वर्णित प्रकृति मानव जीवन का अंग बनकर रह गई है। इस गीतिकाव्य में बाह्य प्रकृति
की मनोरम झाँकी प्रस्तुत है। इस गीतिकाव्य में मानव जगत् को प्राकृतिक जगत् से संबद्ध किया
गया है।
• मेघमार्ग में पड़ने वाले ग्रामों, पहाड़ों और नदियों का सुंदर वर्णन करके कालिदास ने प्रकृति को
सजीव बना दिया है। इसीलिए कालिदास को प्रकृति का सुकुमार कवि कहा जाए तो अतिशयोक्ति
नहीं होगी।
• चमर्वंती नदी, नर्मदा, निर्विंध्या, वेत्रवती, चर्मणवती, सरस्वती और गंगा – इन नदियों का मेघमार्ग में
मानवीकरण करते हुए कालिदास ने इन्हें नायिकाओं के रूप में प्रस्तुत किया है।
( मेघदूत में प्रकृति-चित्रण )